अभ्यास · 7 दिन · रोज़ 15 मिनट · ₹211₹500
7 दिन का साहस अनुष्ठान
हनुमान जी के साथ सात सुबहें: चालीसा, एक लाल फूल, और एक ऐसी चीज़ जिससे आप बचते आ रहे हैं, दिन ख़त्म होने से पहले उसका सामना।
इस अभ्यास का भावहनुमान की शक्ति कभी अपने लिए नहीं थी, वह राम के लिए और दूसरों के लिए थी। इस अभ्यास का भाव है सेवा में लगा साहस: कठिन काम इसलिए करना क्योंकि किसी को उसकी ज़रूरत है।
आपकी प्रगति आपके खाते में सुरक्षित रहती है। नोटबुक की पंक्तियाँ सिर्फ़ इसी फ़ोन पर रहती हैं। कोई दिन छूट जाए तो गिनती फिर से शुरू नहीं होती।
यह 21 दिन के साहस अनुष्ठान का एक हफ़्ते का रूप है: हर सुबह हनुमान चालीसा, और साहस के पाँच काम। शरीर को चलाएँ, वह छोटी-सी बातचीत कर लें, 'ना' कहें, अपनी कोई गलती मानें, और वह काम शुरू करें जिसे आप टालते आ रहे हैं।
यह डर मिटाने का वादा नहीं करता। यह छोटी-छोटी चीज़ों का सामना करने का एक हफ़्ता है, और साहस ऐसे ही बढ़ता है।
रोज़ की याद, आपके अपने कैलेंडर में
हर दिन एक ही समय पर करना ही इस अभ्यास का सबसे बड़ा हिस्सा है। अपना समय चुनें; याद 7 दिन तक आएगी और आज का कदम खोलेगी।
रोज़ की विधि
लगभग 15 मिनट, हर दिन एक जैसा।
- 1
दीया जलाएँ
हनुमान जी के सामने, उनके चरणों में एक लाल फूल रखकर। सीधे खड़े हों या सीधे बैठें।
- 2
चालीसा
हनुमान चालीसा एक बार पढ़ें, हो सके तो बोलकर, शुरू के दोहे से आख़िरी तक। लगभग आठ मिनट।
- 3
उसका नाम लिखें
नोटबुक में: वह एक बात जिसे आप टालते आ रहे हैं और जिसका सामना आज करेंगे। सीधे-सादे शब्दों में लिखें।
- 4
प्रणाम करें और उठें
हाथ जोड़ें, ज़मीन छुएँ, और उठ जाएँ। वह काम दिन ख़त्म होने से पहले होना है।
- 5
रात को
नोटबुक में एक लाइन: क्या आपने उसका सामना किया, और क्या हुआ।
दिन-ब-दिन
01शुरुआत
संकल्प बोलें। वह एक चीज़ लिखें जिससे आप सबसे ज़्यादा बचते आ रहे हैं। आज उसका सामना करना ज़रूरी नहीं; बस उसका नाम लिख दें।
अंतिम दिन का समापन
- सात बार चालीसा. हनुमान चालीसा सात बार पढ़ें।
- अर्पण. गुड़, चना और एक लाल फूल, बाद में सबमें बाँट दें।
- आगे. सुबह की चालीसा जारी रखें, या 21 दिन का साहस अनुष्ठान शुरू करें।
नियम
- काम उसी दिन होता है।
- साहस का मतलब लापरवाही नहीं है। इसमें कुछ भी आपसे किसी को ख़तरे में डालने को नहीं कहता।
- एक दिन छूट जाने से अनुष्ठान नहीं टूटता। अगली सुबह से जारी रखें।
सवाल-जवाब
7 दिन का अनुष्ठान करूँ या 21 दिन का?
सात दिन एक अच्छा पहला कदम है। 21 दिन का अनुष्ठान सोलह और काम जोड़ता है और आदत को ठीक से पक्का करता है।
क्या इससे मेरे डर दूर हो जाएँगे?
यह इसका वादा नहीं करता। यह आपको हनुमान जी के साथ रोज़ की एक साधना और साहस के छोटे काम देता है, जिनसे समय के साथ डर छोटा होता जाता है।
यह ध्यान और अनुशासन का अभ्यास है। इसमें किसी फल का वादा नहीं किया गया है।