अभ्यास · 7 दिन · रोज़ 15 मिनट · ₹211₹500· ऑफ़र 31 दिस॰ तक
7 दिन का रक्षा अनुष्ठान
दुर्गा माँ के साथ सात सुबहें: देवी कवच, एक लाल फूल, और हर दिन अपने घर और परिवार की सुरक्षा की देखभाल का एक व्यावहारिक काम।
इस अभ्यास का भावदुर्गा माँ की तरह रक्षा करती हैं: स्नेह और सजगता से, डर से नहीं। इस अभ्यास का भाव है अपने परिवार की देखभाल प्रेम से करना, चिंता से नहीं।
आपकी प्रगति आपके खाते में सुरक्षित रहती है। नोटबुक की पंक्तियाँ सिर्फ़ इसी फ़ोन पर रहती हैं। कोई दिन छूट जाए तो गिनती फिर से शुरू नहीं होती।
परंपरा में रक्षा दुर्गा माँ का काम है, वह माँ जो रखवाली करती है। कई घरों में देवी कवच पढ़ा जाता है, कवच का वह स्तोत्र जो दुर्गा सप्तशती से पहले पढ़ा जाता है, और कलाई पर लाल कलावा बाँधा जाता है।
यह अनुष्ठान हफ़्ते भर हर सुबह वही पाठ रखता है, और उसके साथ वह व्यावहारिक देखभाल जोड़ता है जो सच में परिवार को सुरक्षित रखती है: ज़रूरी नंबर, ताले, दवाइयाँ, कागज़ात, पासवर्ड। यह नुकसान से रक्षा का वादा नहीं करता, और कोई भी नहीं कर सकता। यह आपको घर का वह व्यक्ति बनाता है जिसने इन बातों के बारे में सोच रखा है।
रोज़ की याद, आपके अपने कैलेंडर में
हर दिन एक ही समय पर करना ही इस अभ्यास का सबसे बड़ा हिस्सा है। अपना समय चुनें; याद 7 दिन तक आएगी और आज का कदम खोलेगी।
रोज़ की विधि
लगभग 15 मिनट, हर दिन एक जैसा।
- 1
सफ़ाई और दीया
दुर्गा माँ के सामने की जगह साफ़ करें और दीया जलाएँ।
- 2
कुमकुम और फूल
तस्वीर पर कुमकुम का एक टीका, चावल के कुछ दाने और एक लाल फूल।
- 3
देवी कवच
देवी कवच एक बार पढ़ें, लगभग दस मिनट। अगर सुबह के लिए यह बहुत लंबा हो, तो इसकी जगह ॐ दुं दुर्गायै नमः का 108 बार जाप करें।
- 4
एक पंक्ति लिखें
नोटबुक में: वह एक चीज़ जो आज आप अपने परिवार के लिए जाँचेंगे या ठीक करेंगे।
- 5
आज का काम
नीचे आज का नोट पढ़ें और दिन ख़त्म होने से पहले उसे कर लें।
दिन-ब-दिन
01शुरुआत
संकल्प बोलें और अपने परिवार की रीति के अनुसार कलाई पर कलावा बाँधें। आपकी देखरेख में जो भी है, उस हर व्यक्ति का नाम लिखें, और हर एक के लिए अपनी एक चिंता।
अंतिम दिन का समापन
- अर्पण. दुर्गा माँ को लाल चुनरी, एक लाल फूल और मिठाई चढ़ाएँ, और एक बार फिर देवी कवच पढ़ें।
- साथ मिलकर. परिवार के साथ प्रसाद बाँटें और दिन 1 को बनाई सूची ज़ोर से पढ़ें।
- इसे बनाए रखें. इमरजेंसी सूची और दवाइयों वाला पन्ना अपडेट रखें। साल में एक बार, या त्योहारों के मौसम से पहले, यह अनुष्ठान दोहराएँ।
नियम
- हर सुबह एक ही समय।
- आज का काम दिन ख़त्म होने से पहले हो जाए।
- एक दिन छूट जाने से अनुष्ठान नहीं टूटता। अगली सुबह से जारी रखें।
सवाल-जवाब
क्या यह अनुष्ठान मेरे परिवार को नुकसान से बचाएगा?
कोई भी अनुष्ठान इसका वादा नहीं कर सकता, और हम भी नहीं करेंगे। यह दुर्गा माँ के साथ सुबह का एक पारंपरिक पाठ रखता है और एक हफ़्ते की व्यावहारिक देखभाल: ज़रूरी नंबर, ताले, दवाइयाँ, कागज़ात और ऑनलाइन सुरक्षा।
कलावा किस हाथ में बाँधें?
हर परिवार में अलग है। आमतौर पर पुरुष दाहिनी कलाई पर बाँधते हैं और विवाहित महिलाएँ बाईं कलाई पर। अपने परिवार की रीति मानें।
क्या बिना दीक्षा के देवी कवच पढ़ सकते हैं?
कई घरों में इसे दुर्गा सप्तशती के हिस्से के रूप में पढ़ा जाता है। अगर आपका परिवार या गुरु कोई ज़्यादा सख़्त नियम मानते हैं, तो इसकी जगह ॐ दुं दुर्गायै नमः का जाप करें।
यह ध्यान और अनुशासन का अभ्यास है। इसमें किसी फल का वादा नहीं किया गया है।